शहडोल की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति से ही नहीं, बल्कि यहां के कुशल शिल्पकारों की पारंपरिक कला से भी है। वर्षों से गोंडी पेंटिंग, काष्ठ शिल्प, रॉट आयरन और कालीन-दरी जैसे हस्तशिल्प यहां के जनजातीय परिवारों की आजीविका और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहे हैं। समय के साथ बदलते बाजार में इन कलाकारों के सामने अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने की चुनौती भी रही। इन्हीं चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है।
संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम, छतवई में डीएमएफ योजना वर्ष 2024-25 के अंतर्गत 50 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में लगभग 200 स्थानीय प्रशिक्षणार्थियों ने गोंडी पेंटिंग, रॉट आयरन, काष्ठ शिल्प तथा कालीन-दरी निर्माण जैसी पारंपरिक विधाओं के साथ आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस पहल ने शिल्पकारों को अपने हुनर को और अधिक निखारने तथा बदलती बाजार की आवश्यकताओं को समझने का अवसर प्रदान किया।
खास बातें
- संत रविदास मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम, छतवई में डीएमएफ योजना वर्ष 2024-25 के अंतर्गत 50 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
- प्रशिक्षण के बाद आयोजित जनजातीय शिल्पकार नामिका मेले ने इन शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच दिया।
- मेले में ट्राइफेड के अधिकारियों ने शिल्पकारों को ऑनलाइन पंजीयन के लिए प्रेरित किया, ताकि उनके उत्पाद फ्लिपकार्ट, अमेजन सहित अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हो सकें।
प्रशिक्षण के बाद आयोजित जनजातीय शिल्पकार नामिका मेले ने इन शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मंच दिया। मेले में ट्राइफेड के अधिकारियों ने शिल्पकारों को ऑनलाइन पंजीयन के लिए प्रेरित किया, ताकि उनके उत्पाद फ्लिपकार्ट, अमेजन सहित अन्य ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हो सकें। इससे स्थानीय हस्तशिल्प को व्यापक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई है। ट्राइफेड द्वारा उत्पादों के विपणन में सहयोग की पहल भी शिल्पकारों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है।



