उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित संरक्षित खेती (शेडनेट हाउस) योजना किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण विकासखंड पेटलावद के ग्राम मोहनपुरा निवासी प्रगतिशील कृषक श्री चन्द्रपाल सिंह राठौर हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीक अपनाकर पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए उल्लेखनीय आर्थिक सफलता हासिल की है।
श्री राठौर पूर्व में अपने खेत में सोयाबीन एवं गेहूं की पारंपरिक खेती करते थे। इससे उन्हें लगभग 25 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। खेती पर लगभग 35 हजार रुपये की लागत आती थी, जबकि कुल आय 77 हजार रुपये तथा शुद्ध आय केवल 42 हजार रुपये रहती थी। सीमित आय के कारण कृषि से अपेक्षित आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा था।
MIDH योजना बनी आर्थिक बदलाव का आधार
उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में श्री राठौर ने MIDH (Mission for Integrated Development of Horticulture) योजना के अंतर्गत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में शेडनेट हाउस की स्थापना की। इस परियोजना की कुल लागत 28.40 लाख रुपये रही, जिसमें शासन द्वारा 50 प्रतिशत अर्थात 14.20 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया।
शेडनेट हाउस स्थापित होने के बाद उन्होंने उन्नत किस्म एफ-1 एमिस्टार (F1 Amistar) खीरे की खेती प्रारंभ की। संरक्षित खेती तकनीक अपनाने से उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
खीरे की खेती से मिली अभूतपूर्व सफलता
शेडनेट हाउस में खीरे की खेती से श्री राठौर को लगभग 800 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस खेती पर लगभग 6 लाख रुपये की लागत आई, जबकि कुल आय 16 लाख रुपये रही। सभी खर्चों के बाद उन्हें लगभग 10 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस प्रकार उनकी शुद्ध आय 42 हजार रुपये से बढ़कर लगभग 10 लाख रुपये हो गई, जो पूर्व की तुलना में लगभग 24 गुना अधिक है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल
श्री चन्द्रपाल सिंह राठौर का कहना है कि संरक्षित खेती के माध्यम से फसल पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का प्रभाव बहुत कम पड़ता है। उन्नत किस्मों का चयन, वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का उपयोग तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद होने से बाजार में बेहतर मूल्य भी मिलता है, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
श्री राठौर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों तथा शासन की योजनाओं का समुचित लाभ लें, तो कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर संरक्षित खेती अपनाने का संदेश दे रही है।







